मेकअप

औरत सिर्फ चेहरे पर ही नहीं, बल्कि घर, परिवार, बच्चे, पति और समाज सभी की कमियों पर हमेशा मेकअप ही करती रहती हैं।
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मेकअप

महिलाएं केवल सौंदर्य के लिए ही नहीं मेकअप करती हैं इसके अतिरिक्त जिंदगी के उतार-चढाव, रिश्ते-नाते, प्रेम-सौहार्द, समस्या संबंधी परेशानियों को संभालते हुए परिस्थिति को सामान्य करती हैं, अर्थात जीवन के हर पहलु पर परदा डालती हैं।    

    

लोग कहते हैं कि औरतें बहुत मेकअप करती हैं। सच ही तो है औरत सिर्फ चेहरे पर ही नहीं, बल्कि घर, परिवार, बच्चे, पति और समाज सभी की कमियों पर हमेशा मेकअप ही करती रहती हैं। दोस्तों की गलतियों पर मेकअप, बेहतर शिक्षा न मिलने पर माता-पिता पर मेकअप, शादी होने पर ससुराल के ताने पर मेकअप, माईके की कमियों पर मेकअप, रिश्तों की बदनीयती पर मेकअप, बच्चों की कमियों पर मेकअप, उनकी गलतियों पर भी मेकअप। बुढापे में दामाद के द्वारा किए गए अनादर पर मेकअप, बहु की बेरूखी पर मेकअप, पोता-पोती की शरारतों पर मेकअप और आखिर में बुढापे में परिवार में अस्तित्वहीन होने पर मेकअप करती हैं। एक औरत जन्म से लेकर मृत्यु तक मेकअप ही तो करती है। तारीफ के दो बोल मिल जाएं तभी तो कहते हैं- बिना मेकअप अधूरी नारी।

कहने का तात्पर्य यह है कि महिलाएं केवल सौंदर्य के लिए ही नहीं मेकअप करती हैं इसके अतिरिक्त जिंदगी के उतार-चढाव, रिश्ते-नाते, प्रेम-सौहार्द, समस्या संबंधी परेशानियों को संभालते हुए परिस्थिति को सामान्य करती हैं, अर्थात जीवन के हर पहलु पर परदा डालती हैं।